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Tuesday, July 7, 2015

अल सल्‍वाडोर के क्रान्तिकारी कवि रोके दाल्‍तोन की कविता - तुम्‍हारी तरह

तुम्हारी तरह 
मैं प्यार करता हूँ प्यार से, 
ज़‍िन्दगी से, 
चीज़ों की मीठी महक से, 
जनवरी के दिनों के नीले नज़ारे से। 

मेरा ख़ून भी ख़ौलता है 
और मैं हँसता हूँ उन आँखों से 
जिन्होंने जाना है आँसुओं का फूट पड़ना 

मुझे यकीन है कि दुनिया ख़ूबसूरत है 
और यह कि रोटी की तरह 
कविता सबकी है।

और यह कि मेरी रग़ें मुझमें नहीं 
बल्क‍ि उन तमाम लोगों के 
एकजुट ख़ून में ख़त्म होती हैं 
जो लड़ते हैं ज़‍िन्दगी के लिए, 
प्यार के लिए, 
चीज़ों के लिए,
नज़ारों और रोटी के लिए,
कविता सबकी।

अनुवाद - आनन्‍द सिंह (अक्षय काळे के मार्गदर्शन में)