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Tuesday, August 30, 2011

शहीदों के लिए

ज़ि‍न्‍दगी लड़ती रहेगी, गाती रहेगी
नदियाँ बहती रहेंगी
कारवाँ चलता रहेगा, चलता रहेगा, बढ़ता रहेगा
मुक्ति की राह पर
छोड़कर साथियो, तुमको धरती की गोद में।

खो गये तुम हवा बनकर वतन की हर साँस में
बिक चुकी इन वादियों में गन्‍ध बनकर घुल गये
भूख से लड़ते हुए बच्‍चों की घायल आस में
कर्ज़ में डूबी हुई फसलों की रंगत बन गये

ख्‍़वाबों के साथ तेरे चलता रहेगा...

हो गये कुर्बान जिस मिट्टी की खातिर साथियो
सो रहो अब आज उस ममतामयी की गोद में
मुक्ति के दिन तक फ़िज़ाँ में खो चुकेंगे नाम तेरे
देश के हर नाम में ज़ि‍न्‍दा रहोगे साथियो

यादों के साथ तेरे चलता रहेगा...

जब कभी भी लौट कर इन राहों से गुज़रेंगे हम
जीत के सब गीत कई-कई बार हम फिर गायेंगे
खोज कैसे पायेंगे मिट्टी तुम्‍हारी साथियो
ज़र्रे-ज़र्रे को तुम्‍हारी ही समाधि पायेंगे

लेकर ये अरमाँ दिल में चलता रहेगा...


Thursday, February 3, 2011

ज़िन्दगी और मौत



मौत का न होना ही ज़िन्दगी नहीं,
और ज़िन्दगी का न होना ही मौत नहीं,
जीते जी इंसान मर सकता है.
और मरते हुए भी इंसान ज़िन्दा रह सकता है.



अंधेरे में रहते हुए भी उजाले की उम्मीद में सार्थक प्रयास ज़िन्दगी की निशानी है,
उजाले में रहते हुए अंधेरे की नज़रंदाज़ी मौत की निशानी है.

वर्तमान उदासी के बावजूद भविष्य के प्रति उल्लास ज़िन्दगी की निशानी है,
ज़िन्दगी की उमंगों के बीच सामाजिक उदासी से विरक्ति मौत की निशानी है.

ज़ुल्म के ख़िलाफ़ जंग में सरफ़रोशी की तमन्ना ज़िन्दगी की निशानी है,
शोषकों से समझौता कर उनके सामने घुटने टेकना मौत की निशानी है

इंसानी अच्छाइयों से असीम प्यार और बुराइयों से बेइन्तेहाँ नफ़रत ज़िन्दगी की निशानी है,
अन्याय और उत्पीड़न को देखते हुए भी अनदेखा करना मौत की निशानी है.

तात्कालिक हार के बाद भी निर्णायक जंग जीतने का इरादा ज़िन्दगी की निशानी है,
भारी जीत के नशे में पैदा अहमन्यता मौत की निशानी है.

ज़मीन पर रहते हुए भी आसमान को छू लेने की ख्वाहिश ज़िन्दगी की निशानी है,
आकाश में उड़ने के बाद ज़मीन से कट जाना मौत की निशानी है.

श्रम करते हुए ज़िन्दगी जीने का तमन्ना ज़िन्दगी की निशानी है,
और ज़िन्दगी जीने की प्रक्रिया में श्रम से अलगाव मौत की निशानी है.

मरते दम तक ज़िन्दगी का एक-एक लम्हा जीने की चाहत ज़िन्दगी की निशानी है,
ज़िन्दा रहते हुए भी मौत की घड़ी का इंतज़ार मौत की निशानी है.

ज़िन्दगी और मौत में लगातार द्वन्द चलता रहता है
शायद इसीलिये इंसान रोज़-रोज़ जीता है और रोज़-रोज़ मरता है,
कभी ज़िन्दगी का पहलू प्रधान होता है तो कभी मौत का.

Saturday, October 16, 2010

ज़िन्दगी ने एक दिन कहा कि तुम लड़ो!!!

ज़िन्दगी ने एक दिन कहा कि तुम लड़ो,
तुम लड़ो, तुम लड़ो
तुम लड़ो कि चहचहा उठें हवा के परिन्‍दे
तुम लड़ो कि आसमान चूम ले ज़मीन को
तुम लड़ो कि ज़िन्दगी महक उठे
और फिर,
प्‍यार के गीत गा उठें सभी
उड़ चलें असीम आसमान चीरते।

ज़िन्दगी ने एक दिन कहा कि तुम उठो,
तुम उठो, तुम उठो
तुम उठो, उठो कि उठ पड़ें असंख्‍य हाथ
चल पड़ो कि चल पड़ें असंख्‍य पैर साथ
मुस्‍कुरा उठे क्षितिज पे भोर की किरन
और फिर,
प्‍यार के गीत गा उठें सभी
उड़ चलें असीम आसमान चीरते।

ज़िन्दगी ने एक दिन कहा कि तुम बहो,
तुम बहो, तुम बहो
रुधिर प्रवाह की तरह बहो कि लालिमा
मिटा सके कलंक की सितम की कालिमा
बहो कि ख़ुशी कै़द कभी की न जा सके
और फिर,
प्‍यार के गीत गा उठें सभी
उड़ चलें असीम आसमान चीरते।

ज़िन्दगी ने एक दिन कहा कि तुम जलो,
तुम जलो, तुम जलो
तुम जलो कि रौशनी के पंख फड़फड़ा उठें
कुचल दिये गये दिलों के तार झनझना उठें
सुषुप्‍त आत्‍मा जगे, गरज उठे
और फिर,
प्‍यार के गीत गा उठें सभी
उड़ चलें असीम आसमान चीरते।

ज़िन्दगी ने एक दिन कहा कि तुम रचो,
तुम रचो, तुम रचो
तुम रचो हवा, पहाड़, रौशनी नयी
ज़िन्दगी नयी महान आत्‍मा नयी
सांस-सांस भर उठे अमिट सुगन्‍ध से
और फिर,
प्‍यार के गीत गा उठें सभी
उड़ चलें असीम आसमान चीरते।

- शशि प्रकाश